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एनएसएफडीसी के बारे में

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    राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (अनुविनि) की स्थापना भारत सरकार द्वारा फरवरी, 1989 में कंपनी आधनियम 2013 की धारा 8 के अधीन सरकारी कंपनी (लाभ निरपेक्ष कंपनी) के रूप में की गई थी।

     

    राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (अनुविनि) की स्थापना भारत सरकार द्वारा फरवरी, 1989 में कंपनी आधनियम 1956 की धारा 25 के अधीन सरकारी कंपनी (लाभ निरपेक्ष कंपनी) के रूप में की गई थी।

    ततकालीन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम का दो अलग निगमों (अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों प्रत्येकं के लिए एकं) में द्विभाजन की घोषणा संबंधी भारत सरकार के आदेशों के परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (अनुविनि) अब दिनांकं 10.04.2001 से अनन्य रूप से अनुसूचित जातियों के विकास के लिए कार्य कंर रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम सामाजिकं न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाला उपक्रम है तथा इसका प्रबंधन एकं निदेशकं मंडल द्वारा किंया जाता है जिसमें केन्द्रीय सरकार, राज्य अनुसूचित जाति विकास निगमों, वित्तीय संस्थाओं एवं अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधित्व कंरने वाले गैर-सरकारी सदस्य होते हैं।

    दिनांकं 31 मार्च, 2016 को निगम की प्राधिकृत अंश पूंजी 1000 कंरोड़ रुपए है।

    अनुविनि का मुख्य उक्तेश्य गरीबी रेखा के दुगुने से कंम पर जीवन-यापन कंरने वाले अनुसूचित जाति परिवारों के व्यक्तियों के कौशल उन्नयन सहित आर्थिकं सशक्तिकंरण के लिए वित्त पोषित कंरना है।

     राज्य सरणी आभकंरणों और संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों द्वारा नामित राज्य सरणी आभकंरणों तथा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से अनुसूचित जातियों के लिए आय सृजकं योजनाओं को वित्त पोषित कंरना। अनुविनि की ऋण नीति के उक्तेश्यों के लिए राज्य सरणी आभकंरणों से आशय भारत के राज्यों या संघ राज्य क्षेत्रों के सरणी आभकंरण होगा जो संबंधित राज्य/संघ राज्य सरकार/प्रशासनों द्वारा संवर्धित हैं तथा पूर्णतः स्वामित्व में हैं और ऐसे अन्य सरणी आभकंरण जो राज्य/संघ-राज्य क्षेत्र सरकारों/प्रशासनों द्वारा नामित हैं और जिनमें उनके अधिकांश शेयर हैं और उनका अधिकांश नियंत्रण है तथा जहाँ तकं उपर्युक्त मान्यता प्राप्त संस्थाओं का संबंध है, वे संस्थाएं पात्र हैं जिन पर अनुविनि का निदेशकं मंडल निर्णय लेता है, और इस संबंध में अनुविनि के निदेशकं मंडल का निर्णय अंतिम होगा।

     

     

     

    • प्रचालन  
    • उक्तेश्य  
    • शेयर पूँजी  

     

    • राज्य सरणी आभकंरणों के माध्यम से लक्ष्य समूह को लघु-ऋण वित्त उपलब्ध कंरना।
    • राज्य सरणी आभकंरणों के माध्यम से कौशल विकास कार्यक्रमो के लिए अनुदान प्रदान कंरना।
    • लक्ष्य समूह एवं राज्य सरणी आभकंरणों को सलाहकारी सेवाएँ प्रदान कंरना।
    • राज्य सरणी आभकंरणों के कौशल स्तर को बढ़ाना।
    • लाभार्थियों के उत्पादों के विपणन हेतु प्रदर्शनी-सह-मेलों का प्रबंध कंरना।
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